नई दिल्ली, अगस्त 27 -- नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF (Employees' Provident Fund) रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि में पैसा जमा करने का एक अहम जरिया है। हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से EPF खाते में योगदान होता है और जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज समय के साथ कंपाउंड होता रहता है। यही कंपाउंडिंग लंबे समय में छोटी-छोटी बचत को बड़े फंड में बदल सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी Rs.50,000 प्रति माह है और वह लंबे समय तक EPF में योगदान करता है, तो एक अनुमान के मुताबिक करीब 30 साल में Rs.2.23 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार हो सकता है। हालांकि, यह एक अनुमानित कैलकुलेशन है और वास्तविक रकम ब्याज दर, सैलरी बढ़ोतरी, योगदान और EPF नियमों पर निर्भर करेगी। यह भी पढ़ें- 9 दिन में ही दोगुना हुआ पैसा, 99% से ज्यादा उछल गया यह छोटकू शेयर...