30 साल तक झेला दर्द...अब भारत-बांग्लादेश गंगा संधि पर 'संकट'; समझिए बिहार की चिंता की वजह
नई दिल्ली, अगस्त 25 -- भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुई ऐतिहासिक गंगा जल बंटवारा संधि, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए थे, अब अपनी अंतिम घड़ियों में है। यह संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। तीन दशकों से दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे विवादास्पद जल मुद्दों में से एक को नियंत्रित करने वाली यह व्यवस्था 1 जनवरी से 31 मई तक शुष्क मौसम के दौरान पश्चिम बंगाल के फरक्का में गंगा के पानी के बंटवारे को तय करती है। दरअसल, संधि का मूल उद्देश्य बांग्लादेश की शुष्क मौसम में नदी के निचले हिस्से में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करना और भारत को कोलकाता बंदरगाह तथा हुगली जलमार्ग की नौवहन क्षमता बनाए रखने में मदद करना था। लेकिन बिहार में इस समझौते को राजनयिक सफलता...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.