मऊ, मई 15 -- दोहरीघाट, हिन्दुस्तान संवाद। मेहनत और लगन से 25 एकड़ क्षेत्रफल में बालू के रेत को किसानों ने हरे सोने की खदान में बदल दिया है। कठिन परिश्रम से उनके बैंक खातों की इबारत भी बदलने लगी है। कभी बाढ़ एवं कटान की प्रलय ढाने वाली सरयू हमेशा तटवर्ती लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं है, बल्कि लाभदायक भी है। यहां से निकल रहे गर्मियों में होने वाले जायद की फसलों के रूप में सब्जियां स्थानीय बाजार गुलजार कर सैकड़ों की आजीविका का मुख्य साधन बन उनकी तकदीर बदल रही हैं। नदी के किनारे के बालू की रेती किनारे बसने वाले किसानों की खेती के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।कस्बे यह भी पढ़ें- रामगंगा की तबाही से बचेंगे गांव, बाढ़ सुरक्षा को 2.29 करोड़ मिले के रामघाट पर पड़े सरयू के रेत पर किसान कड़ी मेहनत करके ककड़ी, खीरा, तरबूज, खरबूजा, करैली, लौकी, कद्दू, न...