246 वर्ष के पहले से चली आ रही है सावन के सोमवार में बाबा विश्वनाथ की यह परंपरा
वाराणसी, अगस्त 2 -- श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में कुछ ही अवसर होते हैं जब गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग की बजाय स्वरूप के दर्शन होते हैं। सावन के सोमवार भी उन अवसरों में शामिल हैं। आप बाबा के विविध स्वरूपों का दर्शन करना चाहते हैं तो रात में धाम आएं। प्रत्येक सोमवार सिर्फ दो घंटे स्वरूप दर्शन होंगे। दो घंटे की यह अवधि सायंकाल की सप्तर्षि आरती के बाद से शयन आरती आरंभ होने यानी रात आठ बजे से रात्रि 10 बजे तक होगी। सावन के सोमवार को सप्तर्षि आरती आठ बजे पूरी हो जाएगी। ऐसे में रात्रि आठ से 10 बजे तक इन स्वरूपों के दर्शन होंगे। विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत परिवार के वरिष्ठ सदस्य पं. ज्योतिशंकर त्रिपाठी के अनुसार रानी अहिल्याबाई के 246 वर्ष पूर्व मंदिर का जीर्णोद्धार कराने के पहले से सावन के सोमवार को बाबा के स्वरूप दर्शन की परंपरा चली आ रही है।स्वरूप...
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