पूर्णिया, जुलाई 9 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। 22 सालों में पूर्णिया में दो नरसंहार हुए। समानताओं एवं विषमताओं के समावेश से लबरेज इन दोनों नरसंहारों ने हैवानियत की बड़ी लकीरें खींची है। समानता इस मायने में कि दोनों ही मामले में आदिवासी समुदाय के लोगों को टीस मिली है एवं विषमता इस मामले में कि 22 साल पुराना मामला जहां आदिवासियों एवं गैर आदिवासियों के बीच उत्पन्न विवाद का नतीजा था, जबकि रविवार देर रात घटित घटना में अपनों ने ही टीस दिया है। करीब 22 साल पूर्व जिले के धमदाहा थाना स्थित कसमरा गांव में जमीन विवाद में जहां अतातायियों ने ना केवल महिला समेत तीन आदिवासियों को मौत के घाट उतारा था, बल्कि दर्जनों आदिवासियों के घरौदों को जलाकर राख कर दिया था। समय के पटरी पर लौटी वहां के जनजीवन में इस कांड में हुई गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज आज भ...
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