बांदा, सितम्बर 20 -- बांदा। विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने करीब 21 साल पुराने घूसखोरी के एक मामले में फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश चंद्रपाल-द्वितीय ने जिला पंचायत कार्यालय महोबा के तत्कालीन स्थापना लिपिक (क्लर्क) आत्माराम सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया है। अदालत ने विजिलेंस (सतर्कता अधिष्ठान) की पूरी ट्रैप कार्रवाई को अवैध व संदिग्ध माना। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब फरियादी का काम ट्रैप से 40 दिन पहले ही पूरा हो चुका था, तो क्लर्क द्वारा रिश्वत मांगने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। अदालत ने यह फैसला 18 सितंबर 2026 को सुनाया है। -----

लोन पास कराने के नाम पर 1000 घूस का था आरोप मामला 28 जून 2005 का है। जब महोबा जिला पंचायत में टैक्स कलेक्टर हनीफुद्दीन ने सतर्कता अधिष्ठान झांसी में शिकायत दर्ज ...