हापुड़, मार्च 11 -- इस्लामिक कैलेंडर के पवित्र महीने रमजान की 21 तारीख को हज़रत सैयदना अली अलैहिस्सलाम की शहादत को याद किया जाता है। इस दिन शिया समुदाय के लोग गहरे दुख और गम के साथ उनकी शहादत को याद करते हैं। घरों और इमामबारगाहों में मजलिसों का आयोजन किया जाता है, जहां आलिम और ज़ाकिर हज़रत अली की जिंदगी, उनके आदर्शों और उनकी शहादत के बारे में विस्तार से बयान करते हैं। इतिहास के अनुसार हज़रत अली अलैहिस्सलाम को 19 रमजान को कूफा की मस्जिद में नमाज़ के दौरान घायल किया गया था, जिसके बाद 21 रमजान को उनकी शहादत हो गई। उन्हें इस्लाम के चौथे खलीफा और पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के दामाद के रूप में भी जाना जाता है। उनकी पूरी जिंदगी इंसाफ, सादगी और इंसानियत की मिसाल मानी जाती है।शिया समुदाय के लोग इस दिन काले कपड़े पहनकर मातम करते हैं और जुलूस भी निका...