कुशीनगर, मई 13 -- कुशीनगर। साल 1968 और 1973-74 में भारत में सोने को लेकर सरकार ने कड़े फैसले लिए थे। इसकी वजह विदेशी मुद्रा संकट, बढ़ता आयात और आर्थिक दबाव था। शहर के पुराने सराफा कारोबारी राजेंद्र वर्मा का कहना है कि 1968 में लागू हुए गोल्ड कंट्रोल एक्ट और 1974 के तेल संकट के दौरान सराफा कारोबार ने कठिन दौर देखा है। उस समय 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले गहनों के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी और लाइसेंस व्यवस्था व कड़े नियमों के कारण छोटे कारोबारी बाजार से बाहर हो गए थे। कानूनी सप्लाई घटने से तस्करी और नकली सोने का कारोबार भी बढ़ चुका था। लेकिन, आज का बाजार पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। पहले भारी गहनों की लोग डिमांड करते थे, क्योंकि सोने का भाव कम था। अब कीमतों में उछाल के बाद ग्राहक कम वजन और आकर्षक दिखने वाले आभूषणों की खरीदारी कर रह...