लखनऊ, जुलाई 10 -- अनिल तिवारी, अम्बेडकर नगर। भारतीय सेना ने जिस टैंक से पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे, वह आज भी अपने शौर्य की कहानी कह रहा है। जब-जब भारत और दुश्मन के बीच युद्धों की चर्चा होती है, हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। साल 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्धों में भारतीय सेना ने जिस अदम्य साहस और रण कौशल का परिचय दिया, उसमें रूस निर्मित टैंक टी-55 की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यही वह टैंक है, जिससे भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। आज वही गौरव गाथा का प्रतीक टैंक उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मुख्यालय अकबरपुर में सीना ताने खड़ा है। कलेक्ट्रेट के निकट अकबरपुर राजकीय हवाई पट्टी के सामने स्थापित यह टी-55 टैंक न सिर्फ इतिहास का साक्षी है, बल्कि हर नागरिक के भीतर देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित...