15 की उम्र में पिता को खोया, फिर बने 'दिशोम गुरु'; शिबू सोरेन ने कैसे बदली झारखंड की राजनीति
रांची, अगस्त 4 -- Shibu Soren: 4 अगस्त 2025 के दिन आदिवासी नेता शिबू सोरेन ने अंतिम सांस ली थी। 'दिशोम गुरू' के नाम से पहचान बनाने वाले शिबू सोरेन का जीवन पिता की हत्या के बाद एकदम बदल गया था। तब उनकी उम्र महज 15 साल थी। इसके बाद छोटे सोरेन ने जल-जंगल-जमीन और आदिवासी समाज के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इसका परिणाम झारखंड राज्य के गठन के तौर पर सामने आया। इस दौरान उन्होंने रात्रि पाठशालाएं चलाईं। शराबखोरी, अंधविश्वास, बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाया। कुल मिलाकर कई सामाजिक योगदान और बलिदान के बाद जब झारखंड राज्य बना, तो उनके हाथ में सत्ता नहीं आई। उन्हें विपक्ष की भूमिका मिली। लगातार संघर्षों के बाद सीएम बने भी, लेकिन महज 10 दिन में कुर्सी छोड़नी पड़ी। दोबारा-तिबारा भी बने, लेकिन मुख्यमंत्री का पद ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहा। आज शिबू सोरेन की पुण्...
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