मधुबनी, अगस्त 9 -- झंझारपुर। भले ही इस वर्ष अभी तक झंझारपुर में बह रही कमला बलान नदी में विनाशकारी बाढ़ का दृश्य देखने को न मिला हो, लेकिन अतीत के पन्नों में दर्ज तबाही के पन्ने आज भी लोगों को थर्रा देते हैं। वर्ष 2019 हो या 2005 से पहले का दौर, इस नदी ने हर बार विनाश की एक नई इबारत लिखी है। बाढ़ के कारण जब-जब तटबंध धराशायी हुए हैं, तब-तब झंझारपुर अनुमंडल के लोगों ने तबाही और बर्बादी का जो खौफनाक मंजर झेला है, उसके निशान पानी सूखते ही धरातल पर नुमाया होने लगते हैं। क्षतग्रिस्त सड़कें, धराशायी फूस के छप्पर, बड़ी-बड़ी इमारतों के बिखरे अवशेष और खेत-खलिहानों से लेकर बाग-बगीचों तक में पसरी बालू की मोटी गाद किसी उजड़े और बर्बाद चमन की गवाही देती है। इसका सबसे ताजा और दर्दनाक उदाहरण वर्ष 2019 में आई विनाशकारी बाढ़ है। इस भयानक मंजर को याद कर झंझ...