लखीसराय, अगस्त 13 -- अजय कुमार, लखीसराय। "शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा..." स्वतंत्रता आंदोलन की यह पंक्ति लखीसराय के उन आठ वीर सपूतों की शहादत की याद दिलाती है, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 13 अगस्त 1942 को अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। लखीसराय रेलवे स्टेशन के समीप स्थित शहीद द्वार और शहीद स्थल आज भी उस ऐतिहासिक घटना की गवाही देते हैं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी लखीसराय रेलवे स्टेशन पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़ रहे थे। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए अंग्रेजी सेना ने किऊल नदी के रेलवे पुल की ओर से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। निहत्थे सेनानी अंग्रेजों की गोलियों के सामने डटे रहे और भारत माता की जय का उद्घोष करते हुए...