प्रयागराज, अगस्त 11 -- रंग दे बसंती समिति की ओर से मंगलवार को हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में 'रंग दे बसंती' शीर्षक से कवि सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि आचार्य शांतनु ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने युवाओं को सनातनी परिपाटी के मूल आधार राष्ट्र प्रथम के सूत्र के साथ जीने का आह्वान किया। सम्मेलन में वाराणसी से आईं कवयित्री आकांक्षा बुंदेला ने पंक्तियां 'देश ने जो पीड़ा झेली देश नहीं भूलता, अशरफ जैसे गुंडे यहां सरेआम घूमते थे' सुनाई तो उपस्थित श्रोताओं ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। डॉ. विनम्रसेन सिंह ने 'मैं हिंदू हूं.. सदियों से जो धैर्ययुक्त सब सहा वो सिंधु हूं' पंक्तियां सुनाकर समा बांधा। संक्षेप बरनवाल 'अक्षत' ने पंक्तियां 'उठो पार्थ गांडीव उठाओ, तुम्हें विजय को लड़ना होगा' सुनाई। मंच पर डॉ. मृत्युंजय राव परमा...