प्रभात कुमार, अप्रैल 17 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) एक संवैधानिक आकांक्षा है और धर्म से इसका कोई लेना-देना नहीं। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी महिलाओं के खिलाफ कथित भेदभाव वाले मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। पीठ उस याचिका पर विचार कर रही है जिसमें कहा गया कि शरीयत के मौजूदा विरासत नियम महिलाओं के साथ स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता एक संवै...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.