अररिया, मार्च 3 -- अररिया, वरीय संवाददाता 'होली' व 'रेणु' का गहरा ताल्लुकात रहा है। आखिर हो भी क्यों नहीं अमर कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु होली से सबंधित कविता से ही तो अपनी साहित्यिक सफर की शुरूआत की थी। संयोग से इस बार रंगोत्सव होली व रेणु जयंती एक ही दिन (चार मार्च) है, इसलिए इस पर चर्चा करनी प्रासंगिक होगी। रेणु जी की पहली कविता थी..साजन! होली आई है। शीर्षक भी यही था। एक बानगी-साजन! होली आई है..सुख से हंसना जी भर गाना, मस्ती से मन को बहलाना..पर्व हो गया आज-साजन होली आई है! हंसाने हमको आई है! हालांकि इसके बाद रेणु जी कहानी व फिर उपन्यास लिखने लगे। रेणु के छोटे बेटे साहित्यकार दक्षिणेश्वर राय पप्पू ने बताया कि होली पर रेणु जी की चार कविताएं उनक दिनों काफी मशहूर भी हुई थी-होली, मंगरू मियां के नए जोगिरे, धमार फगुआ तथा यह फागुनी हवा। रेणु की...
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