नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को महज पूछताछ करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अदालत यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी केवल एक वैधानिक विवेकाधिकार है, जिसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी की शक्ति की व्याख्या एक सख्त वस्तुनिष्ठ जरूरत के रूप में की जानी चाहिए, न कि पुलिस अधिकारी की सुविधा के रूप में। अदालत ने कहा कि इसका यह मतलब नहीं है कि पुलिस अधिकारी महज पूछताछ करने के लिए किसी को गिरफ्तार कर सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह है कि पुलिस अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सात वर्ष तक की कारावास की सजा वाले अपराध के संबंध में जांच ...
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