नई दिल्ली, अगस्त 15 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 साल के बेघर लड़के के साथ कुकर्म करने के दोषी व्यक्ति की सजा में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर रहने वाले बच्चे से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह तारीख, समय या कपड़ों के बारे में उतनी ही सटीकता से जानकारी दे सके, जितनी कि एक स्थिर माहौल में रहने वाला गवाह दे सकता है। आरोपी की याचिका पर 10 अगस्त को पारित फैसले में जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 (कुकर्म) और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम की धारा-छह (गंभीर रूप से यौन हमला) के तहत उसे दोषी ठहराने संबंधी निचली अदालत के अगस्त 2025 का निर्णय बरकरार रखा। हालांकि, जस्टिस सुधा ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 20 साल जेल की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। इस बारे में अदालत ने यह आधार द...