नई दिल्ली, सितम्बर 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार कहा कि कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी संयंत्र लगाने के लिए पर्यावरण मंजूरी की अर्जी देते समय जमीन का पहले से आवंटन या उस पर कानूनी रूप से कब्जा होना जरूरी नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आंकलन (ईआईए), 2006 के क्लॉज 6 में कहा गया कि संभावित जगह की पहचान के बाद ही फॉर्म-1 में अर्जी दी जा सकती है। इसलिए, फॉर्म-1 के तहत अर्जी देने के लिए जमीन का आवंटन पहले से होना कोई जरूरी शर्त नहीं है।न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस फैसले को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रस्तावित कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी संयंत्र के लिए अपीलकर्ता कंपनी को दी गई पर्यावरण मंजूरी रद्द क...