वाराणसी, जुलाई 25 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। आचार्य परशुराम चतुर्वेदी भारतीय संतों की संचार परंपरा के संवाहक थे। उन्होंने संतों के शब्दों को समाज, संस्कार, संस्कृति और परंपरा से जोड़ा। शुक्रवार को बीएचयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित संगोष्ठी में पुरी शंकराचार्य मठ अस्सी के प्रभारी स्वामी वनारण्य सरस्वती ने ये बातें कहीं। 'भारतीय संतों की संचार परम्परा एवं आचार्य परशुराम चतुर्वेदी' विषय पर उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों को बड़ी संजीदगी से संतों ने संवाद और कलात्मक अभिव्यक्ति दी है। आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की पुस्तक 'उत्तर भारत की संत परम्परा का अध्ययन' प्रत्येक हिन्दू धर्मावलंबियों को करना चाहिए। नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि आचार्य परशुराम चतुर्वेदी के साहित्य और उनके योगदान को सभा विस्ता...