नई दिल्ली, मई 19 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को परमाणु ऊर्जा संयंत्र में किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में देनदारी 3,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने वाले 2025 के कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह 'एक बेहद संवेदनशील विधायी नीतिगत मुद्दा' है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पाया कि भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन एवं विकास (शांति) अधिनियम, 2025 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका में उठाए गए मुद्दे 'आर्थिक नीति' से संबंधित हैं। पीठ ने कहा कि हमारी चिंता यह है कि यदि कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है और किसी व्यक्ति को चोट या क्षति पहुंचती है, तो क्या हमारे पास इसके लिए एक मजबूत मुआवज...