नई दिल्ली, अप्रैल 4 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महिला के खिलाफ पति की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दर्ज मामला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी पति या पत्नी पर केवल इसलिए अपने साथी की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं लगा सकते क्योंकि दोनों के बीच वैवाहिक कलह थी। हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की जज उर्मिला जोशी फाल्के की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने कहा कि इस मामले में पति और पत्नी दोनों ने एक-दूसरे पर दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के आरोप लगाए हैं और इसलिए अधिक से अधिक यह कहा जा सकता है कि महिला पुरुष की निराशा का कारण हो सकती है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाने के लिए, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी ने आत्महत्या में कोई भूमिका निभाई थी। पीठ ने बेंच ने 49 साल की एक महिला (जो पेशे...
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