विधि संवाददाता, अप्रैल 7 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाज में बढ़ती उस धारणा पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें आम लोग यह मानने लगे हैं कि रिश्वत देकर कुछ भी हासिल किया जा सकता है, चाहे वह शैक्षणिक डिग्री हो या विश्वविद्यालय में नौकरी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने फर्जी पीएचडी डिग्री और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कानपुर की रहने वाली तान्या दीक्षित ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रियंका सिंह सेंगर व अन्य ने उसे अलीगढ़ स्थित एक विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश और कानपुर के एक विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए पीड़िता और उसकी मां ने आरोपियों के खातों...
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