'रजिया सुल्तान औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि पर गहरी चोट है'
प्रयागराज, अप्रैल 27 -- प्रयागराज, कार्यालय संवाददाता। उपन्यास एक काल सापेक्ष विधा है। इतिहास को उपन्यास के फार्म में लिखने पर लेखक रचनात्मक छूट लेगा ही, तभी उपन्यास संभव होगा। 'रजिया सुल्तान' में लेखक प्रो. हेरंब चतुर्वेदी ने मध्यकालीन इतिहास (सल्तनत काल) को हिंदू-मुस्लिम बाइनरी में नहीं देखा है, उसे सत्ता-संबंधों के संघर्ष में देखा है। यह उनकी इतिहास दृष्टि की आधुनिकता है। यह औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि पर गहरी चोट है। मध्यकालीन इतिहास की पेचीदगियों को समझने के लिए यह उपन्यास बहुत महत्वपूर्ण है। यह सरलीकृत इतिहासबोध को धक्का देता है। यह उपन्यास एक खूबसूरत ट्रैजेडी की तरह बुना गया है। उक्त बातें प्रो. प्रणय कृष्ण ने प्रो. हेरंब चतुर्वेदी की पुस्तक 'रजिया सुल्तान' पर इविवि के हिंदी विभाग में आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे। प्रो. भूरेलाल ने वक...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.