नई दिल्ली, जुलाई 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2015 में दायर एक मुकदमे की सुस्त सुनवाई पर हैरानी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि सुनवाई की इस रफ्तार पर एक घोंघा की सवाल उठा सकता है। दायर मुकदमे में 2026 तक भी वादी के सबूत पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एक निजी कंपनी की अपील पर यह टिप्पणी की, जिसने फरवरी 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने लंबित मुकदमे में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने और एक गवाह को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की कंपनी की अर्जी खारिज कर दी थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि यह मुकदमा 2015 में दायर हुआ था। 2026 तक भी वादी के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं। हम इतना ही कह सकते हैं कि मुकद...