नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जानवरों की कस्टडी को बेजान चीजों की संपत्ति के बराबर नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे विवादों का फैसला करते समय पालतू जानवरों और उनकी देखभाल करने वालों के बीच के भावनात्मक रिश्ते को पूरा महत्व दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने इस तरह तीन बचाए गए पालतू कुत्तों को उनके गोद लेने वाले मालिकों को लौटाने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि इन कुत्तों को उनके मालिकों से अलग करने पर उन्हें गहरा भावनात्मक आघात पहुंचेगा।यह फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें निचली अदालत के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनमें कुत्तों को सुपरदारी (अस्थायी कस्टडी) उस व्यक्ति को सौंपने का निर्देश दिया गया, जो खुद को उनका असली मालिक बता रहा था। यह भी पढ़ें-...
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