'मदद नहीं, मुआवजा चाहिए'... नेपाल ने भारत, अमेरिका और चीन से क्यों मांगा हर्जाना?
नई दिल्ली, सितम्बर 1 -- नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी तबाही में 1,000 से ज्यादा मौतों और लगभग 4,000 लोगों के लापता होने के बीच नेपाल ने अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। नेपाल सरकार ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय शीर्ष उत्सर्जक देशों से 'जलवायु मुआवजे' की मांग करने का कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाया है। 'द काठमांडू पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने साफ किया कि नेपाल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नगण्य योगदान देने के बावजूद दूसरों की ओर से पैदा किए गए जलवायु संकट की सबसे भारी कीमत चुका रहा है।'मदद नहीं, न्याय और कानूनी जवाबदेही चाहिए' नेपाली विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा, "चीन दुनिया का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, उसके बाद अमेरिका दूसरे और भा...
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