'ब्लैक मेहंदी' से त्वचा रोग का बढ़ा खतरा
गोरखपुर, सितम्बर 26 -- गोरखपुर। हरियाली तीज, करवा चौथ और विवाह समारोहों में इस्तेमाल होने वाली रेडीमेड मेहंदी कोन से त्वचा रोग का खतरा बढ़ रहा है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. तुलिका मिश्रा ने लोगों से प्राकृतिक मेहंदी अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि बाजार में बिकने वाली कई ब्लैक मेहंदी कोन में पैरा-फेनिलीनडायमीन (पीपीडी) नामक रसायन मिलाया जाता है, जो बालों की डाई में प्रयोग होता है। यह त्वचा पर लगाने के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे जलन, लालिमा, सूजन, फफोले, स्थायी दाग और गंभीर एलर्जी हो सकती है। बच्चों की कोमल त्वचा पर इसका असर अधिक खतरनाक हो सकता है। डॉ. तुलिका ने बताया कि असली मेहंदी का रंग पहले नारंगी-भूरा होता है और 24-48 घंटे में गहरा होता है, जबकि रासायनिक मेहंदी बहुत क...
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