'बिना भरोसेमंद सबूत के बिना सजा को सही नहीं ठहरा सकते'
नई दिल्ली, सितम्बर 25 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा पाए एक व्यक्ति को बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिर्फ किसी काम के अनैतिक होने से और बिना भरोसेमंद सबूत के सजा को सही नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस उज्जल भुइयां और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को 'बिल्कुल भी भरोसा करने लायक नहीं' बताते हुए कहा कि उसके बयान को कुछ हद तक मानना और कुछ हद तक खारिज करना सही नहीं है। पीठ ने उस व्यक्ति की अपील पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उसने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सितंबर 2013 के फैसले को चुनौती दी थी। यह भी पढ़ें- दुष्कर्म के 27 साल पुराने मामले में शिक्षक बरी हाईकोर्ट ने लुधियाना की ट्रायल कोर्ट द्वारा जून 2012 में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। ट्रायल कोर्ट ने उसे पुराने इंडियन पीनल ...
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