नई दिल्ली, फरवरी 23 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि बिना नौकरी वाली पत्नी खाली नहीं बैठी होती, उसके घर के कामकाज को महत्व न देना गलत है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा है कि गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी के घरेलू कामकाज के योगदान की अनदेखी करना 'अन्यायपूर्ण' है। बेंच ने कहा है कि पत्नी का घरेलू कामकाज कमाने जा रहे जीवनसाथी को सपोर्ट देता है। दरअसल एक मजिस्ट्रेट अदालत ने महिला को अंतरिम गुजारा भत्ता देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वह स्वस्थ और शिक्षित है, लेकिन उसने नौकरी नहीं करने का विकल्प चुना। अपीलीय अदालत ने भी उसे कोई राहत नहीं दी थी।क्या है पूरा मामला? दरअसल दंपति की शादी 2012 में हुई थी और आरोप था कि पति ने 2020 में पत्नी और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। पति का कहना है कि पत्नी 'खाली' नही...
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