नई दिल्ली, जुलाई 16 -- नई दिल्ली। देश के विभिन्न महिला संगठनों, नारीवादी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्त से अलग कर मौजूदा संसद की सीटों पर ही तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण सामाजिक न्याय, समावेशन और संघवाद के तीन स्तंभों पर आधारित होना चाहिए। गुरुवार को आयोजित एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 पारित होने के बावजूद अब तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की कि आगामी मानसून सत्र में संवैधानिक संशोधन कर महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग किया जाए तथा वर्तमान संसद की सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। संसद में महिलाओं की भागीदारी अभी केवल 14 से 16 प्रतिशत और राज्य विधानसभाओं में करीब 10 प्रतिश...