नई दिल्ली, सितम्बर 17 -- शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि अगर उपलब्ध सभी परीक्षण स्पष्ट नतीजे तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं थे, तो चुनाव आयोग दोनों गुटों को आरक्षित चुनाव चिह्न देने से इनकार क्यों नहीं कर सकता था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ बुधवार को शिवसेना में विभाजन से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। इनमें चुनाव आयोग का एकनाथ शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने का फैसला और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार करने का मामला भी शामिल है।'अपने दम पर लड़ें, बालासाहेब के नाम पर नहीं' बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबि...