नई दिल्ली, अप्रैल 13 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष कानूनों के तहत दोषी ठहराए गए कैदी को फरलो देने से इनकार करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने मामले को फैसले के लिए एक बड़ी बेंच को सौंप दिया, क्योंकि हाईकोर्ट के पिछले दो फैसलों में अलग-अलग राय थी। जस्टिस अनिल पानसरे और जस्टिस निवेदिता मेहता की बेंच ने 10 अप्रैल के अपने आदेश में यह सवाल उठाया कि कोई यह कैसे मान सकता है कि विशेष कानूनों के तहत गंभीर अपराधों के लिए दोषी कैदियों को जेल में लगातार कैद रहने के बुरे असर का सामना नहीं करना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर कैदियों की फरलो की पात्रता केवल किसी खास अपराध पर आधारित हो, तो यह फरलो देने के पीछे के उद्देश्य के खिलाफ होगा। यह भी पढ़ें- पेशेवर बदमाशों से दूर रखे जाएंगे पहली बार जेल जाने वाले कैदी, दिल्ली की जेलों में ...
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