'प्रथाओं और समुदायों में निहित है ज्ञान परंपरा'
वाराणसी, अगस्त 11 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू के पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ और विश्वविद्यालय के प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श प्रकोष्ठ की तरफ से सोमवार को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। 'भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन : वैश्विक परिप्रेक्ष्य एवं समकालीन प्रासंगिकता' विषयक सम्मेलन के मुख्य अतिथि आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण थे। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय पहले दार्शनिक और उसके बाद राजनीतिक चिंतक थे। उन्होंने एकात्म मानववाद की दार्शनिक आधारभूमि पर प्रकाश डालते हुए व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्ठि की अवधारणाओं के माध्यम से पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को समझने की जरूरत बताई। कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक जीवंत परंपरा है, जो भारत की सांस्कृतिक प्रथाओं और समुदायों में निहित है। यह भी ...
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