'पूस जाड़ कि माघ जाड़' ने झकझोरा समाज का विवेक
मधुबनी, मई 30 -- मधुबनी, निज संवाददाता। लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय मधुबनी रंग महोत्सव-2026 के पहले दिन प्रस्तुत नाटक 'पूस जाड़ कि माघ जाड़' ने दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी। प्रसिद्ध रंग निर्देशक ऋषि बशिष्ठ के निर्देशन में मंचित इस नाटक ने सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को कई बार भावुक होने और आत्ममंथन करने को विवश कर दिया। पिछली शताब्दी के आठवें दशक के उत्तरार्द्ध में लिखे गए इस नाटक में एक स्त्री के संघर्ष को केंद्र में रखकर समाज की अनेक विसंगतियों को उजागर किया गया। नाटक में घरेलू उत्पीड़न, महिलाओं की असुरक्षा, पुलिस-प्रशासन की संवेदनहीनता, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधियों के बढ़ते प्रभाव तथा बौद्धिक वर्ग के प्रति समाज की उपेक्षापूर्ण सोच को मार्मिक ढं...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.