नई दिल्ली, मार्च 25 -- सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक मामले में सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि 'पहले से' पर्यावरण मंजूरी देना महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस सुरक्षा उपाय है और 'प्रदूषक कीमत चुकाएं' के सिद्धांत को 'प्रदूषण करो और फिर भुगतान करो' में नहीं बदला जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष यह दलील वरिष्ठ अधिवक्ता सृष्टि अग्निहोत्री ने दी। अग्निहोत्री ने उस विचार का विरोध किया, जिसके तहत पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माना चुकाने पर पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी दे दी जाती है।अग्निहोत्री ने जब रियो घोषणापत्र और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अन्य अंतर्राष्ट्रीय समझौतों तथा उनके प्रस्तावों का हवाला दिया, तो पीठ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.