अल्मोड़ा, जून 2 -- मुकेश सक्टा, सल्ट। दवा फैक्ट्री आईएमपीसीएल के निजीकरण का विरोध तेज हो गया है। दूसरे दिन मंगलवार को भी कर्मचारी, स्थानीय ग्रामीण, संगठनों के लोग धरने पर बैठे और नारेबाजी की। साफ किया कि जब तक निजीकरण का समझौता रद नहीं होता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार पर जनविरोधी होने का आरोप लगाया। कहा कि लगातार मुनाफे में चल रही कंपनी को उसकी लागत से भी कम दाम में निजी हाथों को बेच देना सरकार की मानसिकता पर सवाल उठाता है। कहा कि कंपनी ने सालाना करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिया। इसके बाद भी कंपनी को बेचा गया। यह भी पढ़ें- वार्ता के बाद लखवाड़ श्रमिकों का आंदोलन स्थगित कहा कि इस कारखाने से करीब 300 से 400 नियमित, संविदा व ठेका कर्मियों के अलावा हजारों स्थानीय किसानों के साथ मजाक किया गया, जिसे कभी ब...