देहरादून, जून 8 -- गढ़वाली लोक रंगमंच की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्सव ग्रुप के रंगकर्मियों ने सोमवार को हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में 'द्रौपदी चीर-हरण : दुर्पदा की लाज' का शानदार मंचन किया। इस मंचन ने दर्शकों को महाभारत के उस ऐतिहासिक प्रसंग से रूबरू कराया, जिसने धर्म-अधर्म के संघर्ष और नारी सम्मान के प्रश्न को केंद्र में स्थापित किया। नाटक के माध्यम से द्यूत क्रीड़ा, द्रौपदी के अपमान, श्रीकृष्ण की कृपा तथा पांडवों की प्रतिज्ञाओं का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक की शुरूआत द्यूत क्रीड़ा के उस दृश्य से होती है जहां शकुनि की कुटिल चालों में फंसकर युधिष्ठिर अपना राज्य, धन, भाइयों और अंततः द्रौपदी तक को दांव पर हार जाते हैं। इसके बाद राजसभा में द्रौपदी द्वारा उठाया गया प्रश्न-"जिसने स्वयं को हार दिया हो, क्य...