'दादी का रेडियो' में जीवंत हुआ बचपन, 'ठहरे किनारे' में दिखी संवेदना
देहरादून, अक्टूबर 5 -- देहरादून, वरिष्ठ संवाददाता। रचनाकार ज्योत्स्ना जोशी की संस्मरण पुस्तक 'दादी का रेडियो' और काव्य संग्रह 'ठहरे किनारे' का लोकार्पण सोमवार को दून पुस्तकालय सभागार में हुआ। समय साक्ष्य प्रकाशन की ओर से आयोजित समारोह में साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों और समाजकर्मियों ने दोनों पुस्तकों को पहाड़ी जीवन, स्मृतियों और स्त्री-संवेदना का सशक्त दस्तावेज बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार मुकेश नौटियाल ने कहा कि 'दादी का रेडियो' केवल संस्मरण नहीं, बल्कि पहाड़ के विस्थापन और स्मृति के बीच का सेतु है। इसमें गांव की सुबह, पंदेरे की चहल-पहल, धान कूटने की आवाज और लोकजीवन की अनेक ध्वनियां जीवंत हो उठती हैं। ऐसे लगता है जैसे बचपन जीवंत हो उठा हो। शिक्षाविद डॉ. उमा भट्ट ने कहा कि पुस्तक दो पीढ़ियों के संवाद को सामने ल...
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