नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दरगाह के सज्जादानशीन का पद, वक्फ के मुतवल्ली के पद से पूरी तरह से अलग होता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सज्जादानशीन मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक पद है, जबकि मुतवल्ली एक धर्मनिरपेक्ष प्रशासनिक पद है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कर्नाटक की एक दरगाह के सज्जादानशीन के पद के उत्तराधिकार से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हम पाते हैं कि मुतवल्ली और सज्जादानशीन के पदों को एक ही नहीं कहा जा सकता। वक्फ का सज्जादानशीन, उसके मुतवल्ली का काम भी कर सकता है, बशर्ते उसे वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 32(2)(जी) के तहत नियुक्त किया गया हो, लेकिन धारा 32(2)(जी) के तहत नियुक्त मुतवल्ली, सज्जादानशीन के तौर पर काम नहीं कर सकता, बल्क...
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