नई दिल्ली, मई 4 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सोमवार को व्यवस्था दी कि कानून के तहत चिकित्सकीय लापरवाही के किसी भी मामले में यदि डॉक्टर की मृत्यु हो जाती है, तो उसके कानूनी वारिस के खिलाफ कार्यवाही जारी रखी जा सकती है। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने तीन दशक से भी पुराने एक मामले में उस विधिक प्रश्न पर निर्णय दिया, जिसमें एक चिकित्सक ने शिकायतकर्ता की पत्नी का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद उसकी दृष्टि चली गई थी। चिकित्सक और शिकायतकर्ता, दोनों की ही मौत हो चुकी है। अदालत ने इसे एक 'विशेष मामला' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करनी पड़ी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल लागू कानून की व्याख्या कर रही है, न कि यह तय कर रही है कि नीति सही है या ...