नई दिल्ली, अप्रैल 3 -- सुप्रीम कोर्ट के जज विक्रम नाथ ने शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी ने संवैधानिक संस्थाओं की जगह नहीं ली है, बल्कि उस माहौल को बदल दिया है, जिसमें उनकी वैधता स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल एकीकरण अब सिर्फ एक 'अतिरिक्त चीज' नहीं, बल्कि एक प्रक्रियागत नियम बन गया है। जस्टिस नाथ यहां 'डिजिटल गणराज्य में मुक्त न्याय' विषय पर 21वां न्यायमूर्ति पी.डी. देसाई स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही के इंटरनेट के माध्यम से सीधे प्रसारण से व्यवस्था के अंदर जवाबदेही मजबूत होती है, आम लोगों तक पहुंच बढ़ती है, संस्था अपने लोगों से जुड़ी रहती है। इसके अलावा यह भारत में कानूनी साक्षरता को बेहतर बनाने का सबसे असरदार जरिया बन सकती है।उन्होंने कहा कि आज नागरिक फोन और सोशल मीडिया मंचों के जरिये सीखते हैं, प...