'टैंकर में कौन सा खतरनाक पदार्थ था, साबित करने का भार बीमा कंपनी पर'
लखनऊ, अक्टूबर 1 -- हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बीमा कंपनी इस आधार पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कि दुर्घटना के समय टैंकर में स्पिरिट भरी थी और चालक के पास खतरनाक पदार्थों के परिवहन के लिए विशेष अनुमोदन नहीं था।
न्यायालय का निर्णय न्यायालय ने कहा कि यह साबित करने का भार बीमा कंपनी पर होगा कि टैंकर में ले जाया जा रहा संबंधित पदार्थ केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के तहत निर्धारित खतरनाक पदार्थों की श्रेणी में आता था। यह निर्णय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की एकल पीठ ने दिया है। न्यायालय ने कहा कि सिर्फ इस तथ्य से कि टैंकर में स्पिरिट ले जाई जा रही थी, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसमें खतरनाक पदार्थ का परिवहन किया जा रहा था। कहा कि अभिलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह स्थापित हो सके ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.