हल्द्वानी, मई 20 -- बृजेंद्र मेहता हल्द्वानी। उत्तराखंड की राजनीति में जब-जब ईमानदार और सख्त प्रशासकों का जिक्र होगा, मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का नाम सबसे आगे खड़ा दिखाई देगा। मंगलवार को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके जाने के साथ राजनीति का वह अध्याय भी लगभग खत्म हो गया, जहां नेता मंच से तालियां बटोरने के लिए झूठी घोषणाएं नहीं, बल्कि कड़वे सच बोलने का साहस रखते थे। खंडूरी उन नेताओं में थे जो सत्ता को सुविधा नहीं, जिम्मेदारी मानते थे। यही वजह रही कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए कई बार राजनीतिक नुकसान उठाया, लेकिन समझौता नहीं किया。 यह भी पढ़ें- लोकायुक्त पर अन्ना ने लगाई थी मुहर, बीसी खंडूड़ी का मेजर जनरल से मुख्यमंत्री तक का सफर"डिग्री कॉलेज की झूठी घोषणा नहीं करूंगा" वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट पर भाजपा प्रत्याश...