मुजफ्फरपुर, जनवरी 31 -- बंदरा, एक संवाददाता। घोसरामा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शनिवार को कथावाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की शैली सिखाती है। कथा का विश्राम जीवन में कभी नहीं होना चाहिए। कथा हमें परमात्मा का स्मरण करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र यह सिखाता है कि भक्ति में अभाव नहीं, केवल भाव चाहिए। शुकदेव विदाई को वैराग्य की चरम अभिव्यक्ति और व्यास पूजन को गुरु-कृतज्ञता का प्रतीक बताया साथ ही सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया। इससे पहले आचार्यों ने मुख्य यजमान नवीन कुमार, राजीव कुमार, आलोक ठाकुर एवं विकास झा से व्यास पूजन कराया। आयोजकों ने बताया कि ग्रामवासियों ने सहयोग कर इस आयोजन को सफल बनाया। यह आयोजन धार्मिक आस्था, अनुशा...