'जब जल स्रोत असुरक्षित हों, तो कोर्ट उदासीन नही रह सकती'
नई दिल्ली, अक्टूबर 24 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब महत्वपूर्ण जल-स्रोत असुरक्षित हों, तो अदालतें उदासीन नहीं रह सकतीं। कोर्ट ने सभी राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की जमीनी स्तर पर जांच करें और उनकी सीमाएं तय करें। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि जल-स्रोत, जो पीने के पानी का जरिया हैं, बहुत कीमती हैं। ये संविधान द्वारा दिए गए 'जीवन के अधिकार' के दायरे में आते हैं। पीठ ने कहा कि यह अदालत केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती और न ही जल-स्रोतों के असुरक्षित रहने से होने वाले परिणामों के प्रति उदासीन रह सकती है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, कोर्ट ने राज्यों और वेटलैंड प्राधिकरणों को फिर से निर्देश दिया कि वे जल-स्रोतों की जमीनी जांच करें और एक अनुपालन हलफ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.