वाराणसी, अप्रैल 10 -- वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह की चौथी निशा अपने परवान पर है। पहली दो प्रस्तुतियों के बाद ही महौल ऐसा बन गया है मानो यह निशा अपने उत्कर्ष पर पहुंच चुकी हो। सरस्वती वीणा और मेंडोलिन की जुगलबंदी अपना भरपूर असर दिखा रही है। मंच के सामने श्रोताओं की तादाद जितनी दिख रही है उससे कहीं अधिक लोग मंदिर परिसर में फैले हैं। इस निशा में 'चित्रकूट' से चाय की दुकान तक संगीत अपने रसिकों को कभी लुभता रहा तो कभी टहलाता रहा। ऐसा कैसे हुआ आइय आप को शब्दचित्रों से दिखा रहे हैं।आप सोच रहे होंगे संकटमोचन परिसर में चित्रकूट कहां से आ गया। मंदिर परिसर के पूर्वोत्तर हिस्से में एक कोना पिछली चार निशाओं से 'चित्रकूट' ही बना है। फूस की झोपड़ी के बाहर हनुमानजी विराजमान हैं। इस हिस्से को 'चित्रकूट' नाम दिया गया है। 'चित्रकूट' में पर्ण कुटी के दुआर...
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