नई दिल्ली, मार्च 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में यह साफ किया कि जानबूझकर अदालती आदेश की अवहेलना करने पर ऐसे व्यक्ति/ प्राधिकार/अधिकारी भी अवमानना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जो मामले के कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि अवमानना का क्षेत्राधिकार किसी फैसले में बताए गए पक्षकारों से आगे तक फैला हुआ है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति या प्राधिकार को अदालती आदेश के बारे में जानकारी मिल जाती है तो जानबूझकर पालन नहीं करना या उसे न मानना अदालत की अवमानना माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना सिर्फ उस व्यक्ति या प्राधिकार द्वारा आदेश की अनदेखी करने तक सीमित नहीं है, जो सीधे तौर पर मामले से जुड़ा है। कोई तीसरा पक्ष जो मामले में पक्षकार नहीं है, लेक...