नई दिल्ली, जून 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि घर संभालने वाली महिलाओं को सिर्फ गृहिणी (होममेकर) नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माता माना जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा कि किसी दुर्घटना या अन्य कारणों से पत्नी की घरेलू देखभाल और सेवाओं के नुकसान की भरपाई के लिए उनके काम का मूल्य कम से कम 30 हजार रुपये प्रति माह तय किया जाना चाहिए।‌ जस्टिस संजय करोल और एन.के. सिंह की पीठ ने मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े मामलों पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले इस ऐतिहासिक फैसले में कहा कि घर संभालने वाली महिलाओं का काम सिर्फ खाना बनाने तक सीमित नहीं है। पीठ ने कहा कि वे बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखरेख और परिवार को संभालकर समाज निर्माण का कार्य भी करती हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमारा यह भी मानना ​​है कि गृहिणी इंसान और राष्ट्र...