भभुआ, मार्च 2 -- खामोश लब है झुकी हैं पलकें, ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया भी गाये होली, सूफी गीत, गजल और भैरवी राग की प्रस्तुति ने श्रोताओं को बांधे रखा (होली) भभुआ। शहर के तिवारी टोला में रविवार की रात आयोजित होली मिलन समारोह आयोजिता हुआ, जिसमें वाराणसी के कलाकार डॉ. इंद्रदेव चौधरी ने गजल, होली और चैती गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। 'खेले मसाने में होरी दिगंबर से...' प्रारंभ कर गजल 'खामोश लब है झुकी हैं पलकें, ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया...' और अंत में भैरवी राग की प्रस्तुति 'मैं तो चली पिया के देश रे...' तक की यात्रा में इंद्रदेव ने उपस्थित श्रोताओं को झूमने पर विवश किया। उनके बाद वाराणसी की हीं अंशिका सिंह ने जब 'रंग डारुंगी नन्द के लालन पे' और फिर मोपे डारो न रंग गिरधारी' का आलाप भरा तो परिवेश झंकृत हो उठा।...
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