नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- गैर-कानूनी सामुदायिक संस्थाओं को कड़ी फटकार लगाते हुए, राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि स्वयंभू जाति और खाप पंचायतों द्वारा जारी फरमान जिनमें सामाजिक बहिष्कार से लेकर भारी आर्थिक जुर्माने तक शामिल हैं असंवैधानिक हैं और कानून के राज को कमजोर करते हैं। जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने हाल ही में दिए फैसले में इस मुद्दे को एक गंभीर सामाजिक चिंता बताई। एकल पीठ ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह सामाजिक बहिष्कार की शिकायतों से निपटने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाए, जिसे एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का समर्थन प्राप्त हो। इसके अलावा एकल पीठ ने आदेश दिया कि प्रत्येक जिले में 'नोडल अधिकारी' नियुक्त किए जाएं, जो जिला कलेक्टरों और पुलिस प्रमुखों की संयुक्त देखरेख में काम करते हुए, शिकायतों को संभालें और उनका समय पर निव...